संक्षेप में जवाब
जो भुगतान आपने अनुमति नहीं दी, उसे बैंक के धोखाधड़ी/unauthorised लेनदेन चैनल (ऐप, फोन बैंकिंग, अलर्ट का जवाब, ईमेल या शाखा) से तुरंत बताएँ। RBI/2017-18/15 दिनांक 6 जुलाई 2017 बताता है कि दोष और सूचना देने की तेज़ी के अनुसार देयता बँटती है। OTP बाँटना ग्राहक की लापरवाही माना जा सकता है।
EMI केवल लेंडर के आधिकारिक खाते या उसके पत्र में दिए लिंक से भरें। एजेंट का निजी UPI सुरक्षित विकल्प नहीं। अंग्रेज़ी: unauthorised debits।
2017 के परिपत्र की मुख्य शर्तें क्या हैं?
- शून्य देयता: बैंक की लापरवाही/कमी; या तीसरे पक्ष की चूक (न आप, न बैंक) और बैंक की सूचना के तीन कार्य दिवस के भीतर रिपोर्ट।
- क्रेडेंशियल साझा किए हों तो रिपोर्ट तक नुकसान आप पर, उसके बाद बैंक पर — परिपत्र के अनुसार।
- तीसरे पक्ष की चूक पर 4–7 कार्य दिवस की देरी: प्रति लेनदेन देयता लेनदेन मूल्य या तालिका की सीमा (खाते के प्रकार पर ₹5,000 / ₹10,000 / ₹25,000) में जो कम हो।
- 7 कार्य दिवस के बाद: बैंक की बोर्ड-स्वीकृत नीति।
- सूचना के 10 कार्य दिवस में छाया-वापसी (shadow reversal) का प्रावधान।
ये शर्तें हैं, हर विवाद में पूर्ण रिफंड का वादा नहीं।
उसी दिन क्या करें?
- अलर्ट का जवाब दें या बैंक की शिकायत लिंक इस्तेमाल करें। संदर्भ संख्या रखें।
- UTR, राशि, व्यापारी/UPI नाम सहेजें।
- और कटौती रोकने को कहें।
- ऑनलाइन धोखाधड़ी लगे तो cybercrime.gov.in या 1930 भी इस्तेमाल हो सकता है।
- कटौती EMI के नाम पर हो तो लेंडर को भी लिखें।
एजेंट के UPI पर EMI क्यों जोखिम है?
“आज दे दो, केस बंद” कहकर निजी ID माँगना खतरे का संकेत है। पैसे लोन खाते में न चढ़ें तो दोबारा माँग हो सकती है। केवल लेंडर के पत्र वाला खाता इस्तेमाल करें।
Sources
Frequently Asked Questions
क्या हर अनधिकृत डेबिट वापस मिलेगा?
नहीं। परिपत्र दोष और रिपोर्ट की समय-सीमा देखता है।
व्हाट्सऐप पर आया पेमेंट अनुरोध काफी है?
नहीं। लेंडर के आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।
पहले ही एजेंट को पैसे भेज दिए तो?
रसीद रखें, लेंडर से लोन खाते में जमा कराने को लिखें, न हो तो grievance officer को शिकायत करें।
1930 बैंक शिकायत की जगह लेता है?
नहीं। अनधिकृत बैंक/UPI कटौती बैंक को भी बतानी होती है ताकि समय-सीमा चले।
